पवित्र नगरी उज्जैन में वैदिक रीति-रिवाजों से संपन्न की जाने वाली पूजा सेवाएँ
नवग्रह वास्तु शांति पूजा (संस्कृत: Navagraha Vastu Shanti Pujanam) सनातन हिंदू धर्म की एक अत्यंत प्राचीन और कल्याणकारी वैदिक पूजा है, जो पूर्णतः वास्तु पुरुष एवं भूमि देवी को समर्पित है। इस पूजा को पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
प्राचीन काल से ही, हमारे शास्त्रों में यज्ञ, हवन और पूजा-पाठ को मानव जीवन के कल्याण का मुख्य साधन बताया गया है। नवग्रह वास्तु शांति पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मंत्र ध्वनि विज्ञान, पवित्र सामग्री और संकल्प शक्ति का एक दिव्य विज्ञान है। जब हम इस पूजा को विधि-विधान से संपन्न करते हैं, तो हमारे आस-पास सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तेज हो जाता है।
शास्त्रों के अनुसार नवग्रह वास्तु शांति पूजा करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
यह पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है जो व्यापार, नौकरी या करियर में लगातार आ रही रुकावटों से परेशान हैं, पारिवारिक कलह का सामना कर रहे हैं, या मानसिक तनाव और बीमारी से घिरे हैं।
योग्य विद्वान पंडितों के मार्गदर्शन में यह पूजा षोडशोपचार (16 चरणों) विधि से की जाती है। इसकी मुख्य विधि में पवित्रीकरण, आचमन, संकल्प, गणपति एवं गौरी पूजन, कलश स्थापना, अभिषेक, धूप-दीप, नैवेद्य समर्पण, आरती और क्षमा प्रार्थना शामिल हैं।
संस्कृत मंत्र: ॐ नवग्रहेभ्यो नमः ॐ वास्तुपुरुषाय नमः
लिप्यंतरण: Om Navagrahebhyo Namah Om Vastupurushaya Namah
भावार्थ: हम परमपिता वास्तु पुरुष एवं भूमि देवी की आराधना करते हैं, जो सभी विघ्नों और कष्टों को हरने वाले हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि वे हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
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